Thursday, September 27, 2012

माता वैष्णोदेवी यात्रा-भाग १ (मुज़फ्फरनगर से कटरा - KATRA VAISHNODEVI)

माता वैष्णोदेवी यात्रा-भाग १ (मुज़फ्फरनगर से कटरा - KATRA VAISHNODEVI)

प्रिय मित्रों जय माता की. माता वैष्णोदेवी का धाम एक ऐसा धाम हैं जो मुझे बार बार बुलाता हैं. लगभग २२ - २३ साल से लगातार हर वर्ष माता वैष्णोदेवी मुझे और मेरे परिवार को अपने धाम पर बुला रही हैं. बचपन से जा रहा हूँ. पहले पापा और अम्मा के साथ, फिर जब कालेज में पहुंचे तो दोस्तों के साथ, फिर बच्चो के साथ. अब तक करीब २७ -२८ बार माता के धाम पर जा चुका हूँ. अपनी इस यात्रा वृत्तान्त में मैंने कुछ पुरानी यात्राओ के चित्र भी रोचकता और सम्पूर्णता लाने के लिए लगाए हैं. यह यात्रा करीब आठ भाग में जारी रहेगी. आशा हैं आप सभी भाई लोगो को पसंद आएगी. और हमारे अनुभव से नए जाने वाले यात्री कुछ फायदा उठा सके, इसी लिए इस यात्रा वृत्तान्त में मैंने ज्यादा से ज्यादा चित्र अलग अलग स्थानों के देने की कोशिश की हैं. अधिकतर चित्र डिजिटल कैमरे से लिए हुए हैं, कुछ चित्र जो की पुराने हैं वो स्कैन करके लिए हैं. हम लोग अधिकतर अगस्त के आखिर में या सितम्बर के पहले हफ्ते में जाते हैं. इस समय पूरे साल भर में सब से कम भीड़ होती हैं. एक बात और त्योहारों के समय, सरकारी छुट्टियों में, और गर्मी की छुट्टियों में यदि किसी भी तीर्थ स्थान या पर्यटन स्थल पर जाने से बचा जाए तो अच्छा हैं. क्योंकि भारी भीड़ के कारण तीर्थ यात्रा या घूमने का मज़ा किरकिरा हो जाता है.

जय माता की , माता का प्यारा भवन

(मित्रों यह चित्र मैंने चार साल पहले गौरी भवन से लिया था. उस समय बारिश हो रही थी. और मेरे पास एक पुराना कैनन का डिजिटल कैमरा था.)

इस वर्ष हमें वैष्णोदेवी जाने के लिए २९ अगस्त का आरक्षण शालीमार एक्सप्रेस (१४६४५) में मुज़फ्फरनगर से जम्मू तक के लिए जाने के लिए और वापसी का २ सितम्बर को शालीमार एक्सप्रेस (१४६४६) में सीधे तीन महीने पहले करा लिया था. इतना जल्दी आरक्षण भीड़ की वजह से कराना पड़ता हैं. मुज़फ्फरनगर से जाने का किराया सेकण्ड स्लीपर में २२८ रूपये और वापसी का २३८ रूपये हैं. जिस दिन हमें दर्शन करने थे यानिकी ३० अगस्त को, उसके ठीक तीस दिन पहले हमें ऊपर भवन पर स्थित मनोकामना भवन में बेड बुक कराने थे. ठीक रात के बारह बजे इन्टरनेट पर मै वेब साईट " maavaishnodevi.org" खोल कर के बैठ गया. यह वेब साईट माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेब साईट हैं. इस पर आप गौरी भवन, मनोकामना भवन, कालिका भवन पर कमरे या बैड बुक करा सकते हैं. इस पर हेलिकोप्टर की बुकिंग भी करा सकते हैं. इस पर ही आप माता वैष्णो देवी की अटका आरती में बैठने के लिए बुकिंग करा सकते हैं. इसके अलावा दान भी कर सकते हैं. इस साईट पर पहले अपने आप को पंजीकृत कराना पड़ता हैं. और बुकिंग केवल क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के द्वारा ही होती हैं. मैंने ठीक बारह बजे बुकिंग के लिए एंटर किया तो केवल मुझे एक बैड ही मिल पाया जबकि जरुरत ४ बैड की थी. बाकी के तीन बैड मुझे कटरा पहुँच कर निहारिका कोम्प्लेक्ष में बुक करा के मिल गए थे. मित्रों यदि आपके बैड इंटरनेट से ना बुक हो पाए तो आप लोग कटरा पहुँच कर सबसे पहले बस स्टैंड के पास निहारिका कोम्प्लेक्स में जाए, यदि ऊपर भवन पर कमरा या बैड खाली हैं तो आपको ८० रूपये पर बैड मिल जाएगा , कमरे का रेट अलग होता हैं. इसके अलावा यदि आपको कटरा में भी बैड या कमरा चाहिए तो वह भी निहारिका में ही बुक हो जाता हैं. निहारिका का पता में नीचे दे रहा हूँ.

निहारिका भवन, निकट कटरा बस स्टैंड, कटरा, फोन न. 01991-234053, 2328887,
email: online@matavaishnodevi.org 

हमारी ट्रेन का समय ठीक ६.३० शाम को था. हम लोग ठीक ६ बजे स्टेशन पहुँच गए. स्टेशन पर भी प्रतीक्षा करने का एक अलग ही आनंद होता हैं. पता चला की ट्रेन १५ मिनट लेट हैं. दरअसल मेरठ से मुज़फ्फरनगर और सहारनपुर के बीच में सिंगल लाइन हैं. जिस कारण से करीब करीब सभी ट्रेन लेट होती हैं. हमारा आरक्षण S-6 डिब्बे में था. डिब्बे में चढ़ने के बाद वही समस्या जो की पूरे हिन्दुस्तान में रेलवे में हैं. दैनिक यात्री आरक्षित डिब्बों में घुसे रहते हैं. और बड़ा अहसान जताते हुए वे हमें हमारी सीट पर बैठने देते हैं. कहते है की सहारनपुर, यमुनानगर तक की ही तो बात हैं. पता नहीं रेलवे से ये समस्या कब दूर होगी. खैर सहारनपुर के बाद आराम से एडजस्ट हुए, हम घर से आलू ,पूरी, अचार आदि खाने में लेकर के आये थे. खाना खाकर के लंबी तान कर सो गए. सुबह ठीक पांच बजे ट्रेन जम्मू पहुँच गयी. स्टेशन पर अन्धेरा छाया हुआ था. हम लोग अपने सामान सहित बाहर बस स्टैंड पर आ गए.

मुज़फ्फरनगर, लोह्पथ गामिनी स्थानक 

जम्मू रेलवे स्टेशन के बाहर ही बस स्टैंड बना हुआ हैं. जंहा से आपको कटरा, श्रीनगर आदि के लिए बस और टैक्सी मिल जाएगी. कटरा जाने के लिए सरकारी बसे (JNURM) की मिल जाती हैं. कटरा का किराया इसमें ७० रूपये हैं. यह बसे बहुत आराम देह और बिना रुके जाती हैं. कोई भी फ़ालतू सवारी नहीं बैठाती  हैं. जितनी सीट उतनी सवारी.

जम्मू रेलवे स्टेशन पर सरकारी बस स्थानक

जम्मू से चलकर नंदिनी सुरंग होते हुए कटरा करीब ४२ किलोमीटर पड़ता हैं. जम्मू से कटरा तक करीब डेढ़ से दो घंटे लगते हैं. कटरा माता वैष्णोदेवी जाने के लिए आधार स्थल हैं. और अब एक बड़ा व विस्तार में फैला हुआ नगर हैं. कटरा जम्मू कश्मीर के रियासी जिले में पड़ता हैं. और ७५० मीटर की ऊँचाई पर स्थित हैं. हम लोग ठीक ७ बजे कटरा पहुँच गए. और कटरा के मुख्य चौराहे पर उतर गए. यह एक बड़ा चौक हैं जिस पर चारों और होटल बने हुए हैं. और पांच तरफ सड़के जाती हैं. यह चौक ही कटरा की अधिकतर गतिविधियों का केंद्र हैं. नवरात्र के दिनों में इस चौक पर नो दिन तक माता भगवती का जागरण होता हैं, जिसमे देश भर के भजन गायक भाग लेते हैं.

कटरा वैष्णो देवी का मुख्य चौराहा 

कटरा का बस स्थानक

बस से उतर कर हम सीधे अपने होटल मालती  पैलेस पहुंचे. यह होटल कश्मीर रोड पर हैं. और बस स्टैंड से करीब एक फर्लांग दूर हैं. आठ सौ रूपये में हमें एक अच्छा वातानुकूलित शानदार कमरा मिल गया. वैसे कटरा में हर बजट के होटल हैं. बहुत सारी धर्मशालाये भी उपलब्ध हैं. जिनमे क्लोक रूम भी हैं. मालती पैलेस के पीछे ही मानसी गेस्ट हाउस में आपको २००-३०० में  अच्छा कमरा मिल जाएगा. कमरे की बुकिंग हम लोग २ दिन के लिए रखते हैं. सबसे पहले जाकर के निहारिका में ऊपर के लिए मनोकामना भवन में बैड  बुक कराये, और ऊपर दर्शन के जाने के लिए यात्री  पर्ची कटवाई, जो की अनिवार्य  हैं. इस पर्ची के कटवाने के ६ घंटे के अंदर बाण गंगा को पार करना पड़ता हैं. रास्ते में २-३ स्थानों पर पर्ची की चेकिंग  होती हैं. और ऊपर पहुँच कर पर्ची पर नंबर डलवाना जरुरी होता हैं.

हमारा होटल मालती पैलेस 

यह होटल कटरा के मध्यम रेंज के होटलों में हैं, ना ज्यादा महंगा, ना ही सस्ता. इसमें वाहन खड़ा करने के लिए सामने पार्किंग स्थल भी हैं. इसके सामने ही इनका एक और होटल हैं " मयूर  ". वह भी अच्छा होटल हैं. उसमे नीचे बहुत ही अच्छा वाजिब दाम पर खाने के लिए एक रेस्टोरेंट हैं. जंहा के खाने की क्वालिटी अच्छी हैं. होटल मालती पैलेस  का पता निम्नलिखित हैं...

HOTEL MALTI PALACE
Kshmeer Road, KATRA, Ph. No. 01991-233500, 233501, Fax-01991-232733

नाम से आप समझ ही गए होंगे की ये क्या स्थान हैं.

टूरिस्ट सेंटर से आपको यंहा के बारे में पूरी जानकारी मिल सकती हैं. 

यंहा से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए पर्ची  कटती हैं 

पर्ची काउंटर बस अड्डे के पास ही मुख्य चौक पर स्थित हैं.  नहा धोकर हम लोग नाश्ता/खाना आदि के लिए निकले. खाने के लिए कटरा के मुख्य बाजार में कई अच्छे होटल हैं. बाज़ार में घुसते ही दाहिने ओर मुड़कर एक बहुत ही अच्छा होटल हैं. जिसमे अच्छा और स्वादिष्ट खाना वाजिब रेट पर मिल जाता हैं. खाना खाकर के और फिर लौटकर २-३ घंटे आराम किया . और उसके बाद करीब २ बजे बाणगंगा की और चल पड़े. दो पिट्ठू बैग में सारा सामान कर लिया था. एक बैग मैने और एक बैग बेटे ने ले लिया था. पहाड़ पर चढाई में कम से कम सामान होना जरुरी हैं. बाण गंगा के लिए टेम्पो थ्री व्हीलर मुख्य चौक से ही मिल जाते हैं. जो की ५०/- रूपये बाण गंगा तक लेते हैं. 

चौक पर बना हुआ सुन्दर फव्वारा और शिवानी 

कटरा में सूर्योदय के समय का दृश्य 
यह ऊपर वाला फोटो हमने कटरा में सुबह ही सुबह होटल की छत से लिया था. कुछ और भी फोटो लिए थे वे नीचे दिए हैं.

होटल की छत से त्रिकुटा पर्वत का मोहक दृश्य 


त्रिकुटा पर्वत बादलों से ढंका हुआ 

कटरा में स्थित शिव मंदिर 

यह सुन्दर मंदिर कटरा में चौक के पास बाण गंगा मार्ग पर स्थित हैं. बहुत सुन्दर मंदिर बना हुआ हैं.  मंदिर के अंदर के विभिन्न फोटो नीचे दिए हैं.

शिव परिवार 

माँ शक्ति के तीन रूप 

श्री राम परिवार और हनुमान जी 

कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी का पुराना मंदिर 
यह माता वैष्णो देवी का पुराना मंदिर, कटरा के बाज़ार में दाहिने मुड़कर हैं.

त्रिकुटा यात्री निवास 

त्रिकुटा निवास कटरा में स्थित माता वैष्णोदेवी श्राइन बोर्ड द्वारा निर्मित एक पांच मंजिला यात्री निवास हैं. इस में डोरमेट्री हैं. नेट के द्वारा या फिर ओन स्पोट भी बैड  उपलब्ध हो जाते हैं. इसके सामने बहुत बड़ा पार्किंग स्थल हैं. जंहा पर आप अपने वाहन खड़े कर सकते हैं. इसके आस पास खाने पीने की सुविधा भी उपलब्ध हैं. यह भवन इतना विशाल हैं की ऊपर अर्ध कुंवारी और सांझी छत से भी दिखाई देता हैं.

दुकानों पर बिकता हुआ विभिन्न तरह का सामान 
कटरा के बाजार में हर तरह का प्रसाद का सामान व् गिफ्ट आइटम मिल जाते हैं. 

सजी हुई दूकान व रेस्टोरेंट 
करीब २ किलोमीटर लंबा कटरा का बाज़ार हैं. रात के समय सजा हुआ बहुत ही सुन्दर लगता हैं.

कटरा का बाज़ार 

रात के समय फव्वारा 

रात के समय मुख्य चौराहा 

(यह कटरा के रात के फोटो हमने माता के दर्शन करके वापिस आकार लिए थे.)

थ्री व्हीलर के द्वारा हम लोग बाण गंगा पहुँच जाते हैं. और वंहा  से चढाई शुरू कर देते हैं. 

आगे का यात्रा वृत्तान्त पढ़ने के लिए क्लिक करे.....(माता वैष्णोदेवी यात्रा - भाग २ (बाण गंगा से चरण पादुका)
 धन्यवाद, जय माता की.

Sunday, July 8, 2012

यात्रा बद्रीनाथ धाम की

29th May 2010 को हम लोगो ने बदरीनाथ जाने का कार्यक्रम बनाया. मेरा और रवि का , दोनों का परिवार एक बोलेरो गाड़ी में बैठकर बदरीनाथ धाम के लिए निकल पड़े. हम लोग चरथावल से सुबह पांच बजे रवाना हुए. चरथावल से रोहाना होते हुए वाया छपार हम लोग हरिद्वार पहुँच गए. हरिद्वार से निकलकर पहला स्टे हमने देव प्रयाग में लिया. यंहा पर चाय पानी, नाश्ता आदि करके हमारा कारवा फिर से सफर के लिए चल पड़ा. दोपहर का भोजन हम लोगो ने रुद्रप्रयाग में किया. यंहा पर एक पेट्रोल पम्प पर अच्छा खाने का होटल बना हुआ हैं. रुद्रप्रयाग पार करने के बाद मौसम खराब होना शुरू हो गया था. जोरो से हवा चलने लगी थी. ऐसे ही मौसम में कर्णप्रयाग से होते हुए हम लोग जोशीमठ करीब सात बजे तक पहुँच गए थे. जोशीमठ पहुँचते पहुँचते जोरो से बारिश शुरू हो गई थी. मुख्य सड़क पर ही एक गेस्ट हाउस में दो कमरे लिए, और वंही पर रुक गए. थोड़ी देर आराम करके, बारिश रुकते ही भोजन के लिए चल दिए. जोशीमठ में तीन चार अच्छे भोजनालय हैं. खाना अच्छा बनता हैं. ऐसे ही एक होटल में खाने का आनंद लिया. बाहर मौसम बहुत सुहावना हो चुका था, ठंडी हवा चल रही थी. बाकी सब तो गेस्ट हाउस चले गए, मैं और नीलम थोड़ी देर जोशीमठ की सडको पर घूमते रहे. जब थक गए तो आकर के अपने कमरे में सो गए. सुबह जल्दी उठे, और तैयार होकर के पहले गेट की गाडियों की लाइन में लग गए. यंहा से बदरीनाथ जी तक गाडियो का वनवे यातायात रहता हैं. बीच में पांडुकेश्वर में रूट बदल जाता हैं. सुबह छः बजे पहला गेट खुलता हैं. करीब दो घंटे की यात्रा के बाद हम लोग बदरीनाथ जी पहुँच जाते हैं. हमारा गेस्ट हाउस बदरीनाथ जी में बस अड्डा पार करते ही थोडा आगे था. उसका नाम हैं नंदा गेस्ट हाउस. अब तक हम लोग बदरीनाथ जी करीब पांच बार जा चुके हैं. और हर बार इसी गेस्ट हाउस में ही रुकते हैं. अच्छा और सस्ता गेस्ट हाउस हैं. इसी के सामने एक भोजनालय भी बना हुआ हैं, वंहा पर खाने का आनंद लिया जा सकता हैं. इसी गेस्ट हाउस में गाड़ी को पार्क करने की भी सुविधा हैं. 

भगवान बदरीनाथ

बदरीनाथ धाम यानी कि भगवान विष्णु कि नगरी. बद्री धाम उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित हैं. बदरीनाथ विधानसभा क्षेत्र भी हैं. यह मंदिर भगवान विष्णु के बद्री रूप को समर्पित हैं. यंहा पर भगवान विष्णु अपनी पत्नी माता लक्ष्मी, गरुड़ जी, नारद जी, कुबेर जी, उद्धव जी आदि के साथ विराजमान हैं. इसे बद्रीश पंचायत कहा जाता हैं. बद्री का एक अर्थ बेर नामक फल भी होता हैं. कहते है यंहा पर कभी बेरी के वृक्षों कि बहुतायत थी. इसलिए इसे बदरीवन, बद्रिकाश्रम भी कहा जाता है. हम हिन्दुओ के ये चारधाम में एक माना जाता हैं. ऋषिकेश से यंहा कि दूरी करीब 295 किलोमीटर है.

मंदिर में भगवान नारायण कि पूजा होती हैं. और अखंड ज्योति जलती रहती हैं. भक्त लोग दर्शनों से पहले स्नान करते हैं. स्नान के लिए यंहा पर गर्म पानी के कुंड हैं, जिनसे चोबीस घंटे गर्म जल बहता हैं. गर्म जल और ठन्डे जल को मिलाकर एक अलग कुंड बनाया गया हैं, जिसमे भक्त जन स्नान करते हैं. गर्म जल के कुंड में जल इतना गर्म होता हैं कि उसमे चावल भी उबल जाता हैं. भगवान बद्री विशाल के प्रसाद में तुलसी कि माला, चने की दाल, मिस्री आदि का प्रसाद चढाया जाता हैं.

बद्री धाम को भोले शंकर महादेव कि नगरी भी कहा जाता हैं. कहा जाता हैं कि इस नगरी का निर्माण महादेव ने माता पार्वती के लिए किया था. पर ये नगरी भोले नाथ ने भगवान विष्णु को भेंट करदी थी.

भगवान बद्री कि मूर्ति काले शालिग्राम पत्थर से बनी हुई हैं. कहते हैं इस मूर्ति कि स्थापना देवताओं ने कि थी. इसके हजारो साल बाद आदि शंकराचार्य ने पुनः इसे नारद कुंड से निकालकर स्थापित किया था. मन्दिर में बदरीनाथ की दाहिनी ओर कुबेर की मूर्ति है। उनके सामने उद्धवजी हैं तथा उत्सवमूर्ति है। उत्सवमूर्ति शीतकाल में बरफ जमने पर जोशीमठ में ले जायी जाती है। उद्धवजी के पास ही चरणपादुका है। बायीं ओर नर-नारायण की मूर्ति है। इनके समीप ही श्रीदेवी और भूदेवी है।
भगवान् बद्री विशाल 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई, तो यह 12 धाराओं में बंट गई। इस स्थान पर मौजूद धारा अलकनंदा के नाम से विख्यात हुई और यह स्थान बद्रीनाथ, भगवान विष्णु का वास बना। भगवान विष्णु की प्रतिमा वाला वर्तमान मंदिर 3,133 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और माना जाता है कि आदि शंकराचार्य, आठवीं शताब्दी के दार्शनिक संत ने इसका निर्माण कराया था। इसके पश्चिम में 27 किमी की दूरी पर स्थित बद्रीनाथ शिखर कि ऊँचाई 7,138 मीटर है। बद्रीनाथ में एक मंदिर है, जिसमें बद्रीनाथ या विष्णु की वेदी है। यह 2,000 वर्ष से भी अधिक समय से एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थान रहा है।(साभार विकिपीडिया )
हमारा गेस्ट हाउस और पीछे पर्वतराज हिमालय 
इशांक बाबू 
पवित्र नीलकंठ शिखर 

नर और नारायण शिखर


हम लोग गेस्ट हाउस में थोड़ी देर आराम करके दर्शनों के लिए चले. सर्वप्रथम हमलोग तप्त कुंड की और स्नान के लिए गए. वंही पर प्रसाद की दुकाने भी स्थित हैं. प्रसाद की दूकान से बाल्टी और मग भी मिल जाता हैं. जिससे नहाने में आसानी होती हैं. हम लोगो ने अपना सामान प्रसाद की दूकान में रखा और स्नान के लिए चले गए. स्नान के बाद, तैयार होकर प्रसाद लेकर के, दर्शन के लिए लाइन की और बढ़ गए. लाइन देखकर हम लोग भोचक्के रह गए, करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई थी. थोड़ी देर लाइन में लगकर जब ये लगा की चार या पांच घंटे से पहल्र दर्शन नहीं होगे तो बच्चो ने कुछ जुगाड लगाया, मंदिर के गेट पर खड़े सुरक्षा गार्डो के पास गए, उनसे बात की तब उन्होंने बच्चो पर दया करके हम लोगो को मंदिर के गेट के नजदीक लाइन में लगवा दिया, जिससे हमारा नंबर दर्शनों के लिए १५ - २० मिनट में आ गया.

मंदिर परिसर में अंदर दर्शनों के लिए धक्का मुक्की होती हैं. और बड़ी मुश्किलों से दर्शन होते हैं. भगवान बद्री विशाल के दर्शन करके दिल खुश हो गया. दर्शन करने के बाद हम लोग मंदिर से बाहर आ गए. 

आकाश में बादल मंडराने लगे थे. और बारिश होने की संभावना हो गयी थी. हम लोग वापिस अपने गेस्ट हाउस की ओर आ गए. बारिश जोरो से शुरू हो गयी थी. और चारों तरफ अन्धेरा सा छा गए था. हम लोगो का माना और कई जगह जाने का कार्यक्रम था. लेकिन उस दिन लगातार बारिश होती रही, और हमारे आगे के सारे प्रोग्राम रद्द हो गए. खाना हम लोगो ने गेस्ट हाउस में ही मंगा लिया था. मौसम में जबरदस्त ठण्ड हो गयी थी. इसलिए अपनी अपनी रजाइयो में दुबक कर सो गए.

अलकनंदा जी में पवित्र नारद कुंड
यही वह कुंड है  जिसमे  से आदि शंकराचार्य में भगवान बद्री विशाल कि मूर्ति को निकालकर स्थापित किया था.

मंदिर के सामने धर्मशाला 
रवि का परिवार 

इशांक और गाडी का ड्राईवर
हमारा परिवार 

सुन्दर बदरीनाथ  घाटी 

सुन्दर अति सुन्दर
बर्फ से ढकी चोटिया 
अलकनंदा जी पर बना लोहे का पुल
श्री बद्री विशाल के दर्शनों के लिए लगी भक्तो की पंक्ति..
वाह क्या स्टाइल हैं..
मंदिर के पीछे विशाल नारायण पर्वत
आश्रम और झरना 

सुबह जब सोकर के उठे तो बाहर निकलकर देखा, चारों तरफ पहाडिया बर्फ से लदी हुई थी. सारी रात बारिश और बर्फ बारी होती रही थी. मौसम बहुत ही सुहावना और ठंडा था. हल्का हल्का कोहरा छाया हुआ था. सुबह सुबह की चाय पीकर मन तारो ताज़ा किया. और नहा धोकर लौटने की तैय्यारी करने लगे. खैर ये धाम ऐसा है यंहा पर आकर के आदमी यंहा की घाटियों में खोकर रह जाते हैं. किसी हिल स्टेशन से भी खूबसूरत यंहा की घाटिया है. ये तो समय की कमी रहती हैं और वापिस लोटना पड़ता हैं. सुबह नो बजे हम लोग बद्रीनाथ धाम से रवाना हो गए. दोपहर २ बजे तक हम कर्णप्रयाग आ गए, वंहा पर संगम के किनारे एक होटल में दोपहर का भोजन किया, इस दौरान बारिश और आंधी तूफ़ान भी आ रहा था. मौसम बहुत अच्छा था.

सुबह सुबह बर्फ से ढकी चोटिया 

शिखरों पर पड़ी हुई ताज़ी बर्फ 

ऊपर बादल नीचे बर्फ 

पर्वत के पीछे उगते हुए भगवान् भास्कर 

एक और  दृश्य 

श्रीनगर

कर्ण प्रयाग में दोपहर का भोजन करके हम शाम छः बजे तक श्रीनगर पहुँच गए. और उस रात श्रीनगर में गढ़वाल मंडल विकास निगम के रिसोर्ट में हम लोग रुके थे. सौभाग्य से दो कमरे खाली मिल गए थे. रिसोर्ट के सामने ही एक अच्छा भोजनालय है, जिसमे अच्छा खाना मिलता हैं. श्रीनगर शहर माँ अलकनंदा नदी के किनारे स्थित एक सुन्दर नगर है. यह नगर पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित हैं.श्रीनगर गढ़वाल राजाओं की राजधानी रहा हैं. एक सुन्दर घाटी में श्रीनगर शहर बसा हुआ हैं. यंहा पर ठहरने और रहने के लिए अच्छे होटल और गेस्ट हाउस हैं. एक अच्छा विकसित बाजार यंहा पर है. अलकनंदा नदी के किनारे घूमने फिरने के लिए अच्छा पैदल ट्रेक और पार्क बना हुआ हैं. श्रीनगर शहर ५५० मीटर की ऊँचाई पर बसा हुआ हैं. यंहा से पौड़ी १८ किलोमीटर और ऋषिकेश १०८ किलोमीटर पड़ता हैं.
गढ़वाल मंडल गेस्ट हाउस 
श्रीनगर में एक बाँध भी बन रहा हैं. जिसके फोटो मैंने यंहा पर दिए हैं. बाँध का काम बहुत तेजी से चल रहा हैं. इस पर करीब 1000 MW का बिजली घर बनाया जा रहां है. इस बाँध का विरोध भी बहुत हो रहा हैं. जिसके बारे में आप लोगो ने समाचार पत्रों में भी पढ़ा होगा. लोगो को बिजली भी चोबीस घंटे चाहिए और बाँध का विरोध भी करते है.
माँ अलकनंदा जी के ऊपर बन रहा बाँध 

माँ अलकनंदा 
लोहे का झुला पुल 
गंगा जी के ऊपर बना हुआ यह लोहे का झूला पुल श्रीनगर शहर को गंगा पार के गावों से जोड़ता हैं. सुबह शाम यह पुल पर्यटकों के घूमने का स्थान है.
अलकनंदा जी के किनारे इशांक 

ऊपर पुल नीचे माँ गंगा 
सुबह  पांच बजे हम लोग सोकर के उठ गए. और चाय वाय पीकर  हम लोग हरिद्वार के लिए निकल पड़े. हरिद्वार में गंगा जी में स्नान करके हम लोग मुज़फ्फरनगर आ गए. वन्देमातरम