Tuesday, December 22, 2020

JODHPUR TRAVELL -10-बाज़ार और आसपास की सैर

JODHPUR TRAVELL -10-बाज़ार और आसपास की सैर 
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जोधपुर के आसपास की मेरी यात्रा पूरी हो चुकी थी आज का दिन मैंने जोधपुर के बाजारों व घंटाघर के आसपास घूमते हुए गुजारा. सबसे पहले जनता स्वीट हाउस में ढोकला इडली का स्वाद लिया, और मिर्ची बड़े का आनंद लिया. जनता स्वीट हाउस के बारे में मैं अपने पहले के वृत्तान्त में बता चुका हूँ. इडली ढोकला इनकी विशेष डिश हैं. जिसे खाकर मन तृप्त हो जाता हैं. 

ढोकला इडली 
जोधपुर के घंटाघर के सामने से जो मार्ग जाता हैं उसे नयी सड़क बोलते हैं. इस मार्ग पर एक से एक शोरूम बने हुए है. और ये भीड भाड वाला क्षेत्र हैं. 

नयी सड़क पर महावत और हाथी 

नयी सड़क जोधपुर का एक दृश्य 

घंटाघर जोधपुर 

घंटाघर के पिछले ओर के  बाज़ार व पाल हवेली 

घंटाघर व मेहरानगढ़

महरान गढ़ का विहंगम दृश्य 

घंटाघर का व्यस्त बाज़ार 

एक और दृश्य

खरीदारी करते हुए व इधर उधर घूमते विदेशी पर्यटक 

विदेशी पर्यटक चित्रकारी करते हुए 

फ्रांस से आये विदेशी पर्यटक 

विदेशी पर्यटकों के साथ मैं. 

नयी सड़क का व्यस्त बाज़ार 

मशहूर शाही समोसा की दूकान 

यंहा पर मैंने जोधपुर के मशहूर शाही समोसे का आनंद लिया. यह दूकान घंटाघर नयी सड़क पर हैं. क्या स्वाद है जवाब नहीं. बहुत  देर में नंबर आया था.  भीड़ रहती हैं बहुत.

मशहूर नागौरी चाय की दूकान 

यह जोधपुर की मशहूर चाय की दूकान हैं. जो की नयी सड़क पर स्थित हैं. काफी भीड़ रहती हैं. चाय  का जवाब नहीं. एक एक करके तीन चाय पी गया था. 

नयी सड़क पर एक और शोरूम 

अमरचंद कर्नावट शोरूम 

नयी सड़क पर स्थित यह शोरूम राजस्थानी वस्त्रो के लिए प्रसिद्द हैं. इसकी विशेषता बिश्नोई समाज के वस्त्रो के लिए हैं. 

बाज़ार में बहुत देर  घुमा फिरा, उसके बाद अपने होटल में आराम किया, फिर रेलवे स्टेशन की और घुमने निकल गया, यह वृत्तान्त यंही तक....इससे अगला यात्रा वृत्तान्त पढने के लिए क्लिक करे....





Tuesday, October 27, 2020

JODHPUR TRAVELL -9-KOILANA LAKE, कोइलाना झील


JODHPUR TRAVELL -9-KOILANA LAKE, कोइलाना झील

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आज का दिन जोधपुर में मेरा अंतिम दिन था. आज कोइलाना झील की ओर जाना था. लोकल बस पकड़ कर कोइलाना झील पहुँच गया. बहुत बड़ी और जल से भरी हुई झील हैं. इसी झील से जोधपुर नगर को जल वितरण होता हैं. 

कायलाना झील राजस्थान के जोधपुर से आठ किलोमीटर पूर्व में स्थित है। यह एक निर्मित झील है जिसे प्रताप सिंह ने 1872 में बनाया। यह झील लगभग 84 कीलोमीटर2 तक फैली है। प्राचीनकाल में इस क्षेत्र में जोधपुर के दो राजाओं भीम सिंह और तखत सिंह के बाग़ और महल हुआ करते थे। यह झील बनाने के लिए उन्हें तबाह कर दिया गया था।

यह झील आग्नेय चट्टान से बनी अधर्ति पर स्थित है। इसे पानी हाथी नहर से मिलता है जो इंदिरा गाँधी नहर से जुड़ी है। यहाँ पेड़-पौधे बबूल की झाड़ियों पर आधारित हैं और शीतकाल में स्थान-परिवर्तन करने वाले पक्षी जैसे साईबीरियाई क्रेन यहाँ आते हैं। जोधपुर नगर और इसके आसपास के उपनगर और गाँव कायलाना झील से ही पीने का पानी प्राप्त करते हैं।

कोइलाना  झील, प्रताप सागर नामक एक बगीचे से जुड़ी हुई है, जहां पक्षियों की विभिन्न प्रजातियाँ देखी जा सकती हैं। झील का मुख्य आकर्षण सूर्यास्त का अतुल्य दृश्य है। इस समय आकाश शानदार रंगों से बिखरे कैनवस की तरह दिखता है। इस झील के आसपास का क्षेत्र पहले जंगली भालुओं से भरा हुआ था, जो शाही सदस्यों के शिकार का स्थान था। लेकिन, आबादी में बढ़ने के साथ, ऐसा नहीं रहा। इस झील का एक हिस्सा तखत सागर झील के रूप में जाना जाता है जो जोधपुर शहर से लगभग 10 किमी की दूरी पर स्थित है और जिसका नाम राजा तखत सिंह के नाम पर रखा गया है जिसने 19वीं शताब्दी में जोधपुर पर शासन किया था।

झील के पास सिंचाई विभाग, पीएचईडी का एक डाक बंगला भी है। राजस्थान पर्यटन विकास निगम द्वारा पर्यटकों के लिए नौकाविहार सुविधा भी उपलब्ध है। लेकिन तैराकी यहाँ बंद है। यहाँ तक पहुंचने के लिए पर्यटक आसानी से ऑटो रिक्शा या निजी टैक्सी को किराए पर ले सकते है। 

कोइलाना झील - KOILANA LAKE, JODHPUR





झील के किनारे स्थापित राडार 

एक पैडल बोट के ऊपर पक्षी 







झील के किनारे दूर से दिखता एक मंदिर 

झील में बोटिंग 





एक चित्र मेरा भी 

पर्यटक नाव में बैठने की तैय्यारी में 

लाइफ बेल्ट पहने पर्यटक 



झील के किनारे मै 

लडकिया पैडल बोट चलाती हुई 







छोटे बच्चे घुड़सवारी करते हुए 

मुझे पानी में घुसते हुए डर लगता हैं. एक वाटर फोबिया हैं इसलिए मैंने बोटिंग नहीं की. कुछ देर झील के किनारे बिताने के बाद मैं वापिस जोधपुर की और आ गया. आज जोधपुर के बाजारों की भी सैर करनी थी. 

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Saturday, September 26, 2020

JODHPUR TRAVELL -8- UMMED BHAWAN PALACE, उम्मेद महल

JODHPUR TRAVELL -8- UMMED BHAWAN PALACE, उम्मेद महल 

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आज होली से अगला दिन हैं २२/०३/२०१९. आज का सबसे पहला कार्यक्रम हैं उम्मेद  भवन पैलेस का . जो की भारत में स्थित सबसे सुन्दर महलों में एक हैं. पर इस महल का एक छोटा सा ही हिस्सा पर्यटक देख सकते हैं. बाकी के भाग में 5 स्टार होटल चलता हैं. महल के ही एक हिस्से में राजपरिवार रहता हैं. मैं सुबह उठकर नहा धोकर, नाश्ता करके महल की और निकल पड़ा. लोकल ऑटो व गाडियों के द्वारा १५ - २० मिनट में मैं महल के पास पहुँच गया. ऑटो वाले ने मुझे बाहर की ओर उतार दिया. वंहा से महल करीब एक किलोमीटर पड़ता हैं. मैं पैदल पैदल चलता हुआ. २० - २५ मिनट में महल पर पहुँच गया. महल में घुसने से पहले एक टिकट लेना पड़ता हैं. शायद ३० रूपये का हैं. कैमरा का टिकट कोई नहीं हैं. बहुत ही खुबसूरत बहुत विशाल महल सीना ताने रेगिस्तान में खड़ा हैं. गर्व होता हैं अपनी इन विरासतों को देख कर. 

उम्मैद भवन पैलेस राजस्थान के जोधपुर ज़िले में स्थित एक महल है। यह दुनिया के सबसे बड़े निजी महलों में से एक है। यह ताज होटल का ही एक अंग है। इसका नाम महाराजा उम्मैद सिंह के पौत्र ने दिया था जो वर्तमान में मालिक है। अभी वर्तमान समय में इस पैलेस में ३४७ कमरे है। इस उम्मैद भवन पैलेस को चित्तर पैलेस के नाम से भी पहले जाना जाता था जब इसका निर्माण कार्य चालू था।   यह पैलेस १९४३ में बनकर तैयार हुआ था

उम्मेद भवन पैलेस के निर्माण का इतिहास एक संत द्वारा एक अभिशाप से जुड़ा है, जिन्होंने कहा था कि राठौड़ राजवंश के सुशासन के दौरान एक अकाल पड़ेगा। इस प्रकार, प्रताप सिंह के लगभग ५० साल के शासनकाल के अंत के बाद, जोधपुर को लगातार तीन वर्षों की अवधि के लिए १९२० के दशक में भीषण सूखे और अकाल का सामना करना पड़ा। इस कठिनाई का सामना करने वाले क्षेत्र के किसानों ने तत्कालीन महाराजा, उम्मेद सिंह, जो कि जोधपुर में मारवाड़ के ३७वें राठौड़ शासक थे, को कुछ रोजगार प्रदान करने के लिए मदद मांगी, ताकि वे कठोर परिस्थितियों से बच सकें। महाराजा ने किसानों की मदद करने के लिए एक भव्य महल बनाने का फैसला किया। उन्होंने महल के लिए योजना तैयार करने के लिए वास्तुकार के रूप में हेनरी वॉन लानचेस्टर को उत्तरदायित्व दिया; लैंचेस्टर एड्विन लुटियंस के समकालीन थे, जिन्होंने नई दिल्ली सरकार के परिसर की इमारतों की योजना बनाई थी।  लैंचेस्टर ने गुंबदों और स्तंभों के विशेषताओं को अपनाकर नई दिल्ली भवन परिसर की तर्ज पर उम्मेद पैलेस का निर्माण किया। महल को पश्चिमी प्रौद्योगिकी और भारतीय वास्तुकला के समायोजन के रूप में डिजाइन किया गया था।

पैलेस रोड जोधपुर में स्थित उम्मैद भवन पैलेस  से मेहरानगढ़ दुर्ग से ६.५ किमी और जसवंत थड़ा की समाधि से ६ किमी दूर है। यहाँ से अन्य पर्यटन स्थल भी काफी नजदीक हैं।

UMMED BHAWAN PALACE - JODHPUR 

उम्मेद भवन के सामने स्थित एक कॉलोनी 

भव्य महल 

महल का एक दरवाजा 

सुन्दर महल 

महल का प्रांगन 


महल के अन्दर संग्रहालय 

एक से बढ़कर एक चित्रकलाए 

छत के ऊपर चित्रकारी 

राठौर राजाओं के चित्र 





उम्मेद भवन का इतिहास 



महल में एक गलियारा 

राज परिवार के गहने 











ये सब ऊपर राजपरिवार के लोगो के चित्र हैं.





































ऊपर एक से एक पुरानी घड़िया प्रदर्शित हैं 

जोधपुर राज्य का चिन्ह 

महल के अन्दर विशाल प्रांगन 

और ये मैं 














महल का शिखर 


पुरानी कारो का संग्राहलय 

विशाल महल 


महल से निकलते पर्यटक 





दो खुबसूरत बच्चे मस्ती करते हुए 

मैं भी खिंचालू 

UMMED BHAWAN PALACE - JODHPUR 



महल का एंट्री द्वार 

महल के अन्दर बहुत  फोटोग्राफी की, खुलकर की, मन   नहीं भरता हैं. उनमे से कुछ फोटो यंहा पर लगाए. महल में करीब एक डेढ़ घंटा बिताने के बाद मैं बाहर आ गया. एक ऑटो   वाले से लिफ्ट लेकर मैं नीचे आ गया. जी हाँ महल थोड़ी उंचाई पर स्थितं हैं.

नीचे आकर के मैं   चौराहे पर स्थित अय्यपा मंदिर में घुस गया. यह मंदिर भगवान् अय्यप्पन को समर्पित हैं.

भगवान् अय्यपा मंदिर - AYYAPAA TEMPLE, RATNADA - JODHPUR 

मंदिर के अन्दर का दृश्य .

इस मंदिर में भगवान् अय्यप्पा की सुन्दर मूर्ति स्थापित हैं. भगवान अय्यपा भगवान् शिव व भगवान् विष्णु के पुत्र हैं. ये मंदिर  जोधपुर के रतनाडा क्षेत्र में स्थित हैं. इस मंदिर की स्थापना जोधपुर में रहने वाले केरल के निवासियों ने की थी.

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