Sunday, February 17, 2013

माता वैष्णोदेवी यात्रा - भाग ६ (जम्मू - JAMMU - १)

इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढ़ने के लिए क्लिक करे...

  1. माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग -१ ( मुज़फ्फरनगर से कटरा )
  2. माता वैष्णोदेवी की यात्रा भाग -२ (बान गंगा से चरण पादुका)
  3. माता वैष्णोदेवी की यात्रा भाग -३ (चरण पादुका से माता का भवन)
  4. माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग - ४ (माता का भवन और भैरो घाटी)
  5. माता वैष्णोदेवी यात्रा भाग -५ (धनसर बाबा, झज्जर कोटली, कौल कंडोली)

कौल कंडोली माता के दर्शन करने के बाद हम लोग जम्मू पहुँच जाते हैं. 



जम्मू


जम्मू शहर, उत्तर भारत जम्मू-कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी है। यह श्रीनगर के दक्षिण में तवी नदी के किनारे स्थित है और इसके उत्तर में शिवालिक पर्वतश्रेणी है। अब यह रेलमार्ग से जुड़ा है और एक निर्माण केन्द्र है।जम्मू शहर, जम्मू-कश्मीर राज्य की शीतकालीन राजधानी है। जम्मू की प्राकृतिक सुंदरता और बर्फीली पहाडियों का मनोरम दृश्य पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर खीचता है जम्मू 305 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और जम्मू प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है।

इतिहास

एक समय डोगरा राजपूत वंश की राजधानी जम्मू 19वीं शताब्दी में रणजीत सिंह के राज्य का हिस्सा बन गया। जम्मू की स्थापना राजा जम्बू लोचन ने की थी। माना जाता है कि राजा एक बार शिकार करने यहाँ आए थे। उन्होंने एक सरोवर पर एक शेर और बकरी को पानी पीते हुए एक साथ देखा। राजा ने तभी, उसी स्थान पर शहर का निर्माण करवाने का फैसला कर लिया। उन्हें इस बात का अहसास हुआ कि शक्तिशाली व कमज़ोर दोनों ही शान्ति और उदारता के साथ भी रह सकते हैं। राजा ने अपने नाम पर इस जगह का नाम जम्बू रख दिया। धीरे-धीरे यह जम्‍बू से परिवर्तित होकर जम्मू के नाम से जाने जाना लगा।

ऐसा भी कहा जाता है कि रणजीत सिंह से पहले जम्मू सुकरचकिया मिसल के अधीन था लेकिन कई वर्षों से जम्मू के शासक ने 'अधीनता कर' (टैक्स) देना बंद कर दिया था। रणजीत सिंह ने जम्मू के राजा से 'अधीनता कर' देने को कहा तो उसके इंकार करने पर रणजीत सिंह ने वहाँ की जनता पर काफी अत्याचार किये। परिणाम स्वरूप जम्मू के राजा ने बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण कर दिया और हरजाने के रूप में बीस हज़ार रुपये, हाथी और जेवरात दिए। 1809 ई. में भवानीदास ने जम्मू पर आक्रमण कर उसे रणजीत सिंह के राज्य में शामिल कर लिया। जमादार खुशहाल सिंह जम्मू का पहला गवर्नर बनाया गया। 1818 ई. में जम्मू गुलाबसिंह को चार लाख रुपये 'अधीनता कर' के बदले में दे दिया। (साभार : भारत डिस्कवरी)

हम लोग जम्मू पहुंचकर रघुनाथ बाजार में, रघुनाथ मंदिर के निकट स्थित होटल रघुनाथ, जो कि एक पतली गली में स्थित हैं. पर  पहुँच जाते हैं. यह होटल एक सस्ता लेकिन अच्छा होटल हैं. और मंदिर व बाज़ार के नजदीक हैं कमरे साफ़ सुथरे व सुन्दर हैं.  यंहा पर आपको ४०० रूपये से लेकर १०००/-, १५००/-  तक अच्छे कमरे उपलब्ध हो जायेंगे. इसका पता व फोन नंबर में नीचे दे रहा हूँ.

HOTEL RAGHUNATH
NEAR RAGHUNATH TEMPLE, HARI MARKET
JAMMU - 180 001
(TEL- 0191-2520370, 9419360711)

होटल रघुनाथ

होटल में सामान रखकर, थोड़ी देर आराम करके, चाय पानी पीकर के हम लोग घूमने के लिए निकल पड़े. जम्मू में एक खास बात हैं कि, यंहा पर थ्री व्हीलर - टेम्पो आदि लोकल में घूमने के लिए ठीक रहते हैं. और १५० या २०० रूपये में आप को सम्पूर्ण जम्मू घुमा देते हैं. थोड़ी सी बार्गेनिंग करनी  पड़ती हैं. हम लोग सर्वप्रथम अमर महल संग्रहालय जिसे कि रणवीर पैलेस  भी कहते हैं पर पहुँचते हैं, ये महल जम्मू से कटरा मार्ग पर ६-७ किलोमीटर की दूरी पर पड़ता हैं. इसमें प्रवेश करने और फोटो खींचने के लिए टिकट लगता हैं.

अमर महल पैलेस संग्रहालय (रणवीर पैलेस)

लाल पत्थरों से बना यह ख़ूबसूरत महल जम्मू के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। जम्मू की तवी नदी से लगभग 500 फिट ऊपर एक पहाड़ी पर लाल रंग की आकर्षक ईंटों से बना शानदार 'अमर महल' है। अमर महल राजा अमर सिंह का आवासीय महल था। लेकिन बाद में इस महल को संग्रहालय में तब्‍दील कर दिया गया। लाल पत्थरों से बना यह ख़ूबसूरत महल जम्मू के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। अमर महल के एक ओर जहाँ शिवालिक पहाडियाँ है वहीं दूसरी ओर तवी नदी बहती है। इस महल का डिजाइन एक प्रसिद्ध फ़्रेंच वास्तुकार ने किया था, बाद में इसे संग्रहालय में परिवर्तन कर दिया गया और इसका संचालन हरि तारा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा किया जाने लगा।

अमर महल को संग्रहालय का रूप दे दिया गया है यहाँ पर शाही परिवार की अनेक वस्तुएँ देखने योग्य हैं। बिल्कुल विशाल तवी नदी के छोर पर बना यह ख़ूबसूरत महल लौकिक और अलौकिक पक्षों का सुमेल लगता है। चारों ओर एक दिव्यता नज़र आती हैं। आकर्षक इतना कि जैसे स्वर्ग का महल हो। कलकल बहती तवी नदी इस महल को छूकर आगे निकलती है। महल के पीछे की ओर बहती यह नदी दूर-दूर तक भव्य मनमोहनी दृश्य बनाती है।

महल के प्रवेश द्वार से ही मन प्रसन्न हो जाता है। महल के प्रवेश द्वार मुख्य गेट से निकलती सड़क के बाईं और दाईं ओर बहुत ही ख़ूबसूरत मर्मस्पर्शी बागवानी, छोटे-बड़े सुन्दर वृक्ष, हरी-भरी मखमल सी घास, खिलते तरह-तरह के अच्छे सुमन स्वच्छ साफ़ वातावरण, दिलकश महल, किसी स्वर्ग से कम नज़र नहीं आता। चौड़ी साफ़ सड़क के आस-पास इस तरह का वर्गीकरण किया गया है कि प्रात्येक बग़ीचा अपने आपमें एक कहानी कहता है।

मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही आपको लाल और पीले रंग का चमकता हुआ दीर्घ महल नज़र आएगा जिसकी बनावट कला कमाल की है। चारों तरफ एक छतनुमा बरामदा लाल रंग के स्तंभों से ख़ूबसूरती बढ़ाता है। स्तंभों पर खड़ा बरामदा अत्यंत सुंदर तीन मंजिला इमारत को खिड़कियों, झरोखों से सजाया गया है। इस महल से सारा जम्मू नज़र आता है। इसकी खिड़कियाँ और झरोखे इस ढंग से रखे गए हैं कि कई मील दूरी से ही सब कुछ नज़र आता है। इस इमारत से तवी नदी के पार के सब गांव-शहर नज़र आते हैं। दूर-दूर तक सब कुछ दिखाई देता है। (साभार : भारत डिस्कवरी)

रणवीर पैलेस 

महल का एक और दृश्य 

महाराजा रणवीर सिंह जी 

महल के सामने सड़क के पार एक शानदार पार्क है। पार्क के केंद्र में एक मूल्यवान (स्टैचू) घोड़े पर महाराज रणवीर सिंह जी की प्राचीन वेशभूषा वाली प्रतिमा शोभनीय है। इस पार्क में प्रत्येक किस्म के खिलते फूल 'धन्यवाद' कहते हुए अपनी सुगंध से वातावरण को सुगंधित करते चले जाते हैं। प्रत्येक वस्तु बग़ीचे की सुंदरता को उभारती है। सलीका और शैली का अद्भूत सुमेल। महल के बिलकुल सामने की और ही एक पंचतारा होटल भी बना हुआ हैं. जिसमे हमें अंदर  जाने की परमिशन नहीं मिल पायी थी. हम सभी ने महल के और  चारों तरफ फैले पार्क के फोटो खींचे, और बच्चो ने खूब धींगा मस्ती की. 

महल के परिसर में बना हुआ ५ सितारा होटल 

बाहर का सुन्दर दृश्य का अवलोकन करने के बाद हम लोग महल में स्थित संग्रहालय में घुस जाते हैं. इस संग्रहालय में कांगड़ा स्कूल के उत्कृष्ट लघु चित्रों में समकालीन भारतीय कलाकारों की तस्वीरों का प्रदेशन किया गया है, लेकिन यहाँ का प्रमुख आकर्षण डोगरा सिंहासन है जो 120 किलो ठोस सोने का बना हुआ है, जो तत्कालीन महाराजाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।

महल के संग्रहालय में सोने से बना हुआ सिंहासन 

संग्रहालय के अंदर विभिन्न कलाकारों के द्वारा बनाई गए भव्य कलाकृति प्रदर्शित की गयी हैं. जिनकी खूबसूरती एवं कलाकारी देखते ही बनती हैं. इनमे से कुछ कलाकृतियो को मैंने नीचे प्रदर्शित किया हैं.

संग्रहालय में लगी हुई पेंटिंग (श्री कृष्ण अवतार ) 

कच्छप अवतार 

मत्स्य अवतार 

शिव परिवार 

बच्चे मस्ती के मूड में 

सम्पूर्ण रणवीर महल का अवलोकन करने के बाद हम लोग तवी नदी पार करके बाहू के किले पर पहुँच जाते हैं. इस किले के अंदर फोटोग्राफी निषेध हैं. फिर से वही समस्या. पता नहीं क्यों ये होता हैं. ऐसा सिस्टम केवल भारत में विभिन्न स्थानों पर देखने को मिलता हैं. जबकि यदि फोटोग्राफी  की परमिशन हो तो इससे पर्यटन को ही बढ़ावा मिलता हैं.

बाहु क़िला

बाहु क़िला जम्मू से पाँच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तावी नदी के बाएं किनारे पर स्थित यह काफ़ी पुराना क़िला है। तवी नदी के तट पर स्थित सन् 1820 में बना यह क़िला जम्मू की शान है।

यह मंदिर बावे वाली माता के नाम से अधिक प्रसिद्ध है। बाहु क़िले का निर्माण राजा बहुलोचन ने 3,000 वर्ष पहले करवाया था। बाहु के भीतर एक मंदिर बना हुआ है जो देवी काली को समर्पित है। बाहु क़िले से जम्मू शहर का बड़ा ही आकर्षक नजारा होता है। बाहु क़िले के नीचे बाग-ए-बाहु नामक वाटिका है जहाँ पर पर्यटक घुमने आते हैं। मंगलवार और रविवार के दिन मंदिर में भक्तों की अधिक भीड़ रहती हैं। बाहु क़िले के पास ख़ूबसूरत झरना, फूल और बड़े-बड़े वृक्ष मौजूद है।(साभार : भारत डिस्कवरी)

बाहू का किला दूर से 


बाहू के किले का एक और दृश्य

मुबारक मंडी पैलेस


मुबारक मंडी महल की वास्तुकला में राजस्थानी, मुग़ल और यूरोपीयन शैली का समन्वय देखा जा सकता है। इस महल का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। यह महल डोगरा राजाओं का शाही आवास था। इस स्थान पर हम लोग समय अभाव के कारण जा नहीं पाए थे. यह फोटो मैंने दूर से बागे बाहू से लिया था. 




मुबारक मंडी दूर से 


बाहू के किले में माता के दर्शन करने के बाद, वंहा से निकल कर यंहा से नीचे की और बने मछली घर और बागे बाहू गार्डन की और आ जाते हैं. मछलीघर एक शानदार एक्वेरियम बना हुआ हैं. जो की जमीन के नीचे हैं.  इसका प्रवेश द्वार एक बड़ी मछली  के रूप में बना हुआ हैं. यंहा पर दुनिया में पाई जाने वाली विभिन्न प्रकार की मछलियों को प्रदर्शित किया गया हैं. यंहा पर भी फोटो खींचना निषेध हैं.

मछलीघर 

बागे बाहू में बना मछली घर 

मछलीघर का मुख्य द्वार 

विशालकाय मछलीघर और पीछे बाहू का किला

बागे बाहू 

मछली घर के बाद हम लोग बागे बाहू में प्रवेश कर जाते हैं. गनीमत हैं यंहा पर फोटो पर प्रतिबन्ध नहीं हैं. यह बाग ऊँचाई से शुरू होकर, नीचे की तरफ चलता चला जाता हैं. यंहा पर विभिन्न प्रकार के संगीत मय फव्वारे लगे हुए हैं. जो की संगीत की धुनों पर नृत्य करते हैं. यंहा पर चारों तरफ पेड़ पौधे, हरियाली, फूलो की बहार हैं. एक रेस्टोरेंट भी बना हुआ हैं. यंहा पर हम सभी लोगो ने एक दो घंटा जम कर मनोरंजन किया. यह बाग तवी नदी के किनारे एक पहाड़ी पर बना हुआ हैं. यंहा से दूर दूर तक, तवी नदी, जम्मू, और फैले  हुए पहाडो की द्रश्यावालिया बहुत सुन्दर लगती हैं. 



बागे बाहू 

संगीत मय फव्वारे 

क्या फव्वारा हैं... 

बागे बहु, फव्वारा, मछलीघर, बाहू का किला एक साथ 



बाहे बाहु - ऊपर से नीचे 


बागे बाहू नीचे से ऊपर 

बागे बाहू में सुन्दर छोटी छोटी नहरे 

फव्वारे में बना इन्द्रधनुष 

बागे बाहू से सूर्य पुत्री माँ तवी नदी और जम्मू का विहंगम दृश्य 
बागे बाहू में काफी देर मनोरंजन करने के बाद हम लोग वापिस अपने होटल रघुनाथ पहुँच गए. सभी लोग थक कर चूर थे. खाना हम लोगो ने अपने कमरे में ही मंगा लिया था. खाना खाकर, सभी लोग लंबी तानकर सो गए. कल का हमारा कार्यक्रम रघुनाथ मंदिर और उसके आसपास बाजार आदि  घूमने और खरीदारी करने का था. जय माता की. 

इससे आगे का यात्रा वृत्तान्त जानने  के लिए क्लिक करे.

"माता वैष्णो देवी यात्रा भाग -७ (जम्मू - jammu 2)"