Friday, June 1, 2012

हरि का द्वार हरिद्वार - भाग २..


हरिद्वार - ऋषिकेश 

अपने होटल से हम गंगा स्नान करने के इरादे से हर की पौड़ी जैसे ही पहुंचे, हमारे होश उड़ गए, वंहा पर भयंकर  भीड़ देखकर. फिर विचार किया कि ऋषिकेश स्वर्गाश्रम चला जाए, वंही पर माँ गंगा में डुबकी लगायेगे. हरकी पौड़ी और गंगा जी को पार करके हम ऋषिकेश  मार्ग पर पहुंचे. एक थ्रीव्हीलर में बैठकर हम लोग सीधे स्वर्गाश्रम पर पहुँच गए. करीब ३५-४० मिनट का समय हम लोगो को लगा. और करीब २० रूपये सवारी के हिसाब से हमने किराया दिया. हम लोग शिवानंद झूला या फिर राम झूला पार करके स्वर्गाश्रम पर पहुँच गए. फिर हमने और बच्चो ने माँ गंगा में डुबकी लगाई. माँ गंगा में स्नान करके मन पवित्र हो गया. पता नहीं क्या बात हैं कि माँ गंगा में कितनी बार भी स्नान करो मन नहीं भरता हैं. और एक खास बात ओर हैं कि कितनी ही गर्मी क्यों न हो, गंगा जी में स्नान करके सुड़की आ जाती है. 

ऋषिकेश हरिद्वार से करीब २५ किलोमीटर दूर हैं. इसको हिमालय का प्रवेशद्वार भी कहा जाता है. ऋषिकेश हिन्दुओ के सबसे पवित्र स्थलों में से एक हैं. ऋषिकेश को केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. यह कहा जाता हैं कि यंहा पर भगवान विष्णु ऋषिकेश अवतार में प्रकट हुए थे. इसलिए इस स्थान का नाम ऋषिकेश हैं. वैसे तो  ऋषिकेश में सैकड़ो मंदिर आश्रम हैं, पर समय अभाव के कारण में कुछ ही मंदिरों और आश्रमो में जा सका.

स्वर्ग आश्रम पर गंगा जी में स्नान

यंहा स्वर्गाश्रम पर गंगा जी का बहाव बहुत तेज हैं, गहराई बहुत है, तो स्नान करते समय एक तो किनारे पर ही नहाये, और यंहा पर जंजीरे भी पड़ी हुई हैं, जिन्हें पकड़कर स्नान कर सकते है. बच्चो को स्नान कराते समय बच्चो का ध्यान रखे, उन्हें आगे मत जाने दे. एक बात का और ध्यान रखे कि यंहा पर अपने सामान का ध्यान रखे, यदि एक मिनट को भी आप कि नज़र चूक गयी तो आपका सामान गायब हो जाएगा. ये गलती हमारे से हुई थी. मेरी पत्नी नीलम का पर्स साफ़ हो गया था.

स्नान करते हुए थोडा ध्यान करलु 

एक नौका के सहारे दोनों भाई 

नहा धोकर फोटो भी जरा फोटो भी खिचवाले

स्नान करने के बाद भूख बहुत जोर कि लगती हैं. खाना खाने के लिए यंहा के मशहूर चोटीवाला होटल में पहुँच गए. चोटीवाला होटल यंहा पर, और बहुत ही मशहूर होटल है. यंहा के खाने का ज़वाब नहीं है. खाना थोडा सा महंगा जरूर हैं, पर स्वादिष्ट है. यंहा कि खास बात हैं कि चोटीवाला का प्रतीक स्वरुप एक व्यक्ति होटल के मेंन गेट पर बैठा रहता हैं, जिसका चित्र मैंने नीचे दिया हैं. इस होटल में बड़े बड़े फिल्मस्टार भी खाना खा चुके हैं. वैसे खाने पीने के लिए यंहा पर बहुत सारे होटल हैं. तीर्थ यात्री अपने बज़ट के हिसाब से उनमे खाना खा सकते है. 

चोटीवाला होटल का एक जीता जागता प्रतीक 

भोजन करने के बाद हम वंहा पर स्थित विभिन्न मंदिरों और आश्रमो के दर्शन करने के लिए निकल पड़े. सबसे पहले स्वर्गाश्रम के दर्शन किये. इसका निर्माण बिरला परिवार ने करवाया हैं. इस आश्रम में ठहरने के लिए कमरे आदि बने हुए हैं, जिनमे दूरदराज से आने वाले यात्री ठहरते है. एक समस्या यंहा पर बहुत लगी कि किसी भी आश्रम या फिर धर्मशाला में क्लोक रूम् का सिस्टम नहीं हैं. जिससे यात्रियों को अपना सामान रखने कि बहुत समस्या आती हैं. हमारे जैसे यात्री जिनके साथ थोडा बहुत बैग आदि होते हैं, वो परेशान हो जाते हैं, और अपना सामान उठाये हुए घूमना पड़ता हैं. 


स्वर्गाश्रम पर गंगा जी के किनारे एक टावर 

स्वर्गाश्रम के बराबर में ही गीता भवन आश्रम हैं, जंहा से आप गीता प्रेस गोरखपुर कि पुस्तके खरीद सकते हैं. यंही से आप लोग गीता भवन वालो कि आयुर्वेदिक दवाईया भी खरीद सकते हैं. गीता प्रेस कि स्थापना सेठ हनुमान प्रसाद पोद्दार ने कि थी. और जितना कार्य गीता प्रेस गोरखपुर ने हिंदू धर्म के लिए किया हैं, शायद ही किसी ने किया हैं. इस प्रेस ने हिंदू धर्म के पर उपलब्ध पुस्तकों का प्रकाशन किया हैं. आज तक करीब ५ करोड पुस्तके प्रकाशित हो चुकी हैं. जो कि एक वर्ल्ड रिकार्ड है. 

गंगा जी और दूसरे किनारे का एक दृश्य 



भगवान शिव ध्यान मुद्रा में


भगवान शिव कि यह मूर्ति गंगा जी के अंदर परमार्थ निकेतन के सामने स्थापित हैं. परमार्थ निकेतन एक बहुत ही बड़ा और भव्य आश्रम हैं. इस के प्रांगन में बहुत सारे मंदिर बने हुए हैं. इस आश्रम के संस्थापक और संरक्षक स्वामी चिदानंद जी महाराज हैं. स्वामी चिदानंद जी फिल्म स्टार विवेक ओबेराय और उनके परिवार के कुलगुरु भी हैं. ये लोग हर साल इनके पास जरूर आते हैं और कुछ दिन जरूर बिताते हैं. यंहा पर नित्य गंगा आरती का आयोजन होता हैं, जो कि देखने वाला दृश्य होता हैं. परमार्थ निकेतन ऋषिकेश में स्थित सबसे भव्य और शानदार आश्रम हैं 

परमार्थ निकेतन का मुख्य द्वार 



परमार्थ निकेतन में एक सुंदर कृति



परमार्थ निकेतन में ही एक और सुन्दर कृति



राणा के साथ महाराणा  अमन 



सुस्ताते हुए एक फोटो हो जाए 

भगवान शिव की एक और मूर्ति 



भगवान शिव 



भगवान श्री कृष्ण अपनी गाय के साथ 



हनुमान जी

आज के दिन एक परेशानी वाली बात और थी कि, गर्मी बहुत पड़ रही थी. और गर्मी कि वजह से हालत खराब थी  सब लोग भगवान जी से ये दुआ कर रहे थे कि ठंडा मौसम हो जाए, तभी भगवान जी ने म्हारी सुन ली और बड़े जबरदस्त बादल  घुमड़ आये. और आंधी तूफ़ान आना शुरू हो गया. ज़बरदस्त बारिश शुरू हो गयी थी. मौसम बहुत ही सुहावना हो गया था. एक और ऊंचे पहाड़ और दूसरी और माँ गंगा क्या दृश्य था. 


आसमान में घटाये और भगवान जी 



पेड़ के ऊपर गणेश जी की आकृति 



गंगा जी में नौकायन 


बादलों की छाँव में गंगा जी और गीता भवन 



ऊपर घटाये नीचे गंगा जी की लहरे 


इस तरह से हम दुसरे किनारे पर पहुँच गए. मौसम बहुत ही सुहावना हो गया था. वंही सामने ही हम लोग सीढियों पर बैठ कर मौसम  का आनंद लेने लगे. तभी सामने से रिवर राफ्टिंग करने वालो कि बोट आ गयी. यह एक बहुत ही खतरनाक खेल हैं. ऋषिकेश से ऊपर शिव पुरी से ये लोग बोट के द्वारा गंगा जी कि खतरनाक लहरों और बड़ी बड़ी चट्टानों से जूझते हुए, ऋषिकेश तक पहुँचते है. इस खेल में कभी कभी जान पर भी बन जाती है. बच्चे उन लोगो कि तरफ हाथो से इशारा करके उन्हें विश् करने लगे,  उन लोगो ने भी जवाब में विश् किया.


गंगा जी में राफ्टिंग 



गंगा जी के दूसरे किनारे से लिया गया फोटो 



अंगद की तरह पैर जमाये खड़ा हैं



एक फोटो मेरा भी 



शिवानंद झूला और गंगा जी 


यह पुल स्वामी शिवानंद और शिवानंद आश्रम के कारण शिवानंद झूला कहलाता हैं. हम लोग समय अभाव के कारण इससे थोड़ी ही दूर लक्ष्मण झूला नहीं जा पाए थे.




गंगा जी में एक नाव यात्रियों को ले जाती हुई 



गंगा जी स्वर्गाश्रम और पीछे नीलकंठ पर्वत 



दिन में ही अँधेरा हो गया 


बादल इतने जबरदस्त थे कि दिन में ही अन्धकार सा हो गया था. काफी थक चुके थे, और सीढियों पर बैठकर विश्राम करने लगे, वंही पर एक चाय वाला, एक भेलपुरी वाला , और एक छोले वाला खड़ा था. एक एक कप चाय, और भेलपुरी, छोले आदि मंगा लिए, और चाय कि चुस्की के साथ माँ गंगा कि लहरों का, और मौसम का मज़ा लेने लगे.


चलते चलते एक एक कप चाय हो जाए 

इसके साथ ही हमारी हरिद्वार  ऋषिकेश यात्रा पुरी हो चुकी थी. थ्री व्हीलर में बैठ कर हरिद्वार कि और चल दिए. और बस में बैठ कर रात ९ बजे मुज़फ्फरनगर आ गए. वन्देमातरम.

10 comments:

  1. pravin babu,bahut hi sunder prastuti.

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  2. जब रुड़की में पढ़ता था तो यहाँ के कई चक्कर लगे थे। यादें ताज़ा हो गयीं।

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    1. धन्यवाद मनीष जी, आप रुड़की में पढते थे, और में रुड़की, और मुज़फ्फर्नगर में रहता था.

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  3. गुप्ता जी क्या शानदार दर्शन कराये गंगा मैया के मज़ा आ गया !सभी तस्वीरें तो लाजवाब हैं !अभी तक मैं जाट देवता ,नीरज जाट ,मनु त्यागी ,और विधान चन्द्रा की यात्रायें ही पढ़ रहा था ! एक बात कहना चाहूँगा अगर हो सके तो यात्रा के बाद खर्चा कितना आया ये भी लिख दे तो बहुत ही बढ़िया रहेगा !इससे ये फायदा होगा की परिवार के साथ घुमने का कितना खर्चा आता है ,सबको पहले ही पता होगा !
    गंगा मैया की जय ...

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  4. धन्यवाद सुरेश जी, दरअसल ये यात्राये उस समय कि हैं, जब मैंने ब्लोगिंग कि शुरुआत नहीं की थी. अब आगे जो भी यात्राये होगी उनमे कितना खर्चा हुआ और कौन से होटल में ठहरे, सब जानकारी अब में डिटेल में देने की कोशिश करा करूँगा, धन्यवाद...

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  5. apke fotograf ati sunder he / lekhan bhi achcha he /jankari ke liye sadhuvad /

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  6. apke fotograf ati sunder he / lekhan bhi achcha he /jankari ke liye sadhuvad /

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